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शुक्रवार, 29 अप्रैल 2022

भारत के सभी राज्यों का लोक महोत्सव // ALL EXAM के लिए

भारत के सभी राज्य के महत्वपूर्ण महोत्सव  है। जो आपके सभी परिक्षा में आने की संभावना है ।   प्रश्न है


1🛑मांडू महोत्सव                      - मध्य प्रदेश


2🛑 बेलम केव्स फेस्टिवल           -  आंध्र प्रदेश


3🛑 लाई हरोबा महोत्सव             - त्रिपुरा


4🛑 बक्सा पक्षी महोत्सव            - पश्चिम बंगाल


5🛑 ज़ो कुटपुई महोत्सव              - मिजोरम


6🛑 धनु जात्रा महोत्सव               -ओडिशा


7🛑 माधवपुर मेला                      - गुजरात


8🛑 रथ उत्सव                            - तमिलनाडु


9🛑 राष्ट्रीय युवा महोत्सव             -लखनऊ यूपी


10🛑 करावली उत्सव                    - कर्नाटक


11🛑 माघ बिहू                              -असम


12🛑 जल्लीकट्टू                          - (मदुरै) तमिलनाडु


13🛑 चपचारकुट महोत्सव              -मिजोरम


14🛑 नवाचार महोत्सव                   -अरुणाचल प्रदेश


15🛑 नागोबा जात्रा                          - तेलंगाना


16🛑 सूरजकुंड शिल्प मेला              -हरियाणा


17🛑 काला घोड़ा कला महोत्सव      - मुंबई


18🛑 हॉर्नबिल फेस्टिवल 2020      - नागालैंड व त्रिपुरा


19🛑 Lui-Ngai-Ni उत्सव               -मणिपुर


20🛑 लोसार महोत्सव                      -हिमाचल प्रदेश


21🛑 मिर्च महोत्सव                        -मध्य प्रदेश


22🛑 राष्ट्रीय जैविक खाद्य महोत्सव -नई दिल्ली


23🛑 कोबीता उत्सव                       -पश्चिम बंगाल


24🛑 गंगा क्याक महोत्सव              -उत्तराखंड


25🛑 नमस्ते ओरछा त्योहार             -मध्य प्रदेश


26🛑 फगली उत्सव                          -हिमाचल प्रदेश 


27🛑 होला मोहल्ला त्योहार.             -पंजाब

रविवार, 24 अप्रैल 2022

TOTAL STATION ( टोटल स्टेशन ) का PDF एवं नोट सेसनाल इग्जाम के लिए महत्वपूर्ण है।

 टोटल स्टेशन ( TOTAL STATION):- टोटल स्टेशन ( T.S.) या टोटल स्टेशन थियोडोलाइट ( TST ) एक इलेक्ट्रॉनिक ऑप्टिकल उपकरण है जिसका उपयोग सर्वेक्षण और भवन निर्माण के लिए किया जाता है।

      यह एक इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजिट थियोडोलाइट है जो एक इलेक्ट्रॉनिक दूरी माप ( E . D. M ) के साथ एकीकृत है जो ऊर्ध्वाधर और क्षैतिज कोण और उपकरण से ढलान की दूरी को एक विशेष बिंदु तक मापने के लिए और डेटा एकत्र करने और  त्रिकोणासन करने के लिए एक ऑन - बोर्ड कम्प्यूटर है।

  इस यंत्र का उपयोग स्लोप दूरी , ऊर्ध्वाधर कोण एवं क्षैतिज कोण आदि मापने के लिए किया जाता है।

** टोटल स्टेशन के भाग ( PARTS OF TOTAL STATION ) :- इसका प्रमुख भाग निम्नलिखित हैं :-

1. डिस्प्ले ( DISPLAY) :- टोटल स्टेशन में विभिन्न सूचनाओं को  दर्शाने के लिए डिजिटल डिस्प्ले का उपयोग किया जाता है।

2. ऑपरेशनल पैनल ( OPERATIONAL PANEL ) :- टोटल स्टेशन द्वारा पूर्ण किए जाने वाले विभिन्न फंक्शन को सम्पन्न करवाने के लिए डिस्प्ले के पास ऑपरेशनल पैनल लगा होता है।

3. समरेखक ( COLLIMATOR) :- यह समान्यत : टोटल स्टेशन उपकरण के सामने वाले भाग में लगा होता है। इससे लेजर लाइट निकलती है, जो कि लक्ष्य ( Target ) से टकराकर आवश्यक डाटा एकत्रित करती है।

4. ( ऑब्जेकटिभ  लेंस )OBJECTIVE  LENS :- इसका उपयोग टोटल स्टेशन उपकरण में समरेखक से निकलने वाली किरणो को एकत्रित करने एवं टारगेट को देखने के लिए किया जाता है।

5. डाटा आउट कनेक्टर ( Data out connetor ) :- टोटल स्टेशन द्वारा एकत्रित किए गए डाटा को प्राप्त करने के लिए डाटा आउट कनेकटर का उपयोग किया जाता है। यह एक पोर्टनुमा संरचना होती है।

6. ऑप्टिकल प्लमेट (OPTICAL PLUMMET ):- ऑप्टिकल प्लमेंट , टोटल स्टेशन में लगा वह घटक है जो सर्वे की माप को सटीकता से मापने मे सहायक होता है।

7. लेवलिंग स्क्रु ( LEVELLING SCREW ) :- यंत्र से सही मापन करने के लिए इसका एक तल में स्थिर रहना बहुत आवश्यक होता है। यंत्र को स्थिर रखने के लिए लेवलिंग स्क्रू का प्रयोग किया जाता है।


*** टोटल स्टेशन में प्रयुक्त उपसाधन (ACCESSORIES USED IN TOTAL STATION) :- टोटल स्टेशन में प्रयुक्त उपसाधन निम्न लिखित है :-

1. इलैक्ट्रॉनिक्स थियोडोलाइट (Electronic Theodolite)
2. ऑन - बोर्ड माइक्रो प्रोसेसर (On-board microprocessor)
3. डाटा कलैक्टर (Data cellector )
4. डाटा स्टोरेज (Data storage )
5. प्रिज्म ( Prism )
6. चार्जर एवं एडैप्टर (Charger and Adaptor)
7. त्रिपाद (Tripod)

1. इलैक्ट्रॉनिक थियोडोलाइट(Electronic Theodolite):- - यह ट्राएंगुलेशन उपसाधन है । इसकी सहायता से क्षैतिज एव ऊर्ध्वाधर दोनो प्रकार के कोण मापे जाते है , यह टोटल स्टेशन का अति महत्वपूर्ण उपकरण है।

2. ऑन - बोर्ड माइक्रो प्रोसेसर ( On - board microprocessor):- माइक्रोप्रोसेसर, आधुनिक इलैक्ट्रॉनिक्स का एक महत्वपूर्ण घटक है। टोटल स्टेशन में माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग विभिन्न कार्यो को दक्षता के साथ सम्पन्न करने के लिए किया जाता है। 

3. डाटा कलैक्टर (Data Cellector ) :- यह एक क्रिटिकल उपासधन है क्योकिं यह सर्वे करने वाले व्यक्ति का डाटा रिकॉर्ड रखता है। इनबिल्ट( Inbiuilt) डाटा कलेक्टर आदर्श प्रकार का साधन है , क्योकिं यह स्वचालित तरीके से डाटा रिकॉर्ड रखता है

4. डाटा स्टोरेज(Data storage):-टोटल स्टेशन द्वारा एकत्रित किए गए डाटा को स्टोर करने के लिए डाटा स्टोरेज का उपयोग किया जाता है ।

5. प्रिज्म ( Prism ) :-टोटल स्टेशन में प्रयुक्त प्रिज्म , सर्वे एवं त्रिविमीय एवं मॉनिटरिंग सिस्टम से ऊंचाई और बिंदु की स्थिति में होने वाले परिवर्तन को मापने के लिए प्रयुक्त किया जाता है ।

इसकी पृष्ठभूमि का रंग काला होता है ।

6. चार्जर एवं एडैप्टर ( charge and Adaptor) :-स्टेशन को प्रचलित करने के लिए पावर सप्लाई की आवश्यकता होती है अतः इसके लिए सेल अथवा बैट्रियों का उपयोग करते हैं इसी बैट्रि को चार्ज करने के लिए चार्जर एडैप्टर का उपयोग करते हैं

7.त्रिपाद ( Tripod ) :-टोटल स्टेशन उपकरण को सपोर्ट करने अथवा उसे उसकी यथास्थिति में बनाए रखने के लिए त्रिपाद का उपयोग किया जाता है ।इसमें तीन पाद होते हैं , इसलिए इसे त्रिपाद कहते हैं इसके ऊपरी भाग को हैड कहते हैं जो कि एकदम समतल होते हैं

***स्टेशन की विशेषताएं (CHARACTERISTICS OF TOTAL STATION):-

(i). इसके द्वारा किसी बिंदु की दूरी एवं कोण को मापा जा सकता है तथा भविष्य में उपयोग करने के लिए रिकॉर्ड भी किया जा सकता है ।

(ii). इसकी सहायता से किसी बिंदु की ऊंचाई आसानी  मापी जा सकती है।

(iii).किसकी सहायता से वातावरणीय दाब, तापमान, प्रिज्म ' नियतांक  का उपयोग कर सटीक मान प्राप्त किया जाता है । यह भौतिकी परिवर्तन के आधार पर सही गणना करने वाला उपकरण है ।

( iv) .इस उपकरण पर धूल एवं नामी का कोई प्रभाव नहीं पड़ता है ।

(V).किसी अन्य उपकरण की अपेक्षा इसे प्रचारित करना आसान होता है ।

( Vi).इसकी सहायता से किसी दूर स्थित बिंदु से भी मापन किया जा सकता है ।

**टोटल स्टेशन के प्रमुख लाभ (ADVANTAGES OF TOTAL STATION):-टोटल स्टेशन के प्रमुख लाभ निम्नलिखित है :-

( i ). इसकी सहायता से क्षेत्रफल की दक्षतापूर्वक गणना  करना संभव होता है ।

(ii) .यह अधिकतर क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होता है ।

( iii ) . यह किसी भू -भाग जिसका सर्वे किया गया हो का ग्राफिकल व्यू प्रदर्शित करने में सक्षम होता है ।

( iv). इससे एक बार में ही 3 से 5 किमी तक की दूरी मापी जा शक्ति है इससे प्रचालन समय में कमी आती है ।

(v) .इससे त्रिपाद स्टैंड पर आसानी से सेट किया जा सकता है ।

( vi) . यह पुराने नक्शे से भी डाटा प्राप्त करने में सक्षम होता है ।

( vii) .यह सार्वे करने पर प्राप्त डाटा को स्टोर करता है ।

(viii) .इसमें डिजिटल डिस्पले का उपयोग होता है जो वाटरप्रूफ होता है ।

**टोटल स्टेशन के हानियां (DISADVANTAGES OF TOTAL STATION):- इसकी हानियं निम्नलिखित हैः- 

(i) .यह उपकरण महंगा होता है एवं इसको प्रचलित करने के लिए दक्ष कर्मचारियों की आवश्यकता होती है ।

(ii) . इस सर्वे का पूर्ण उपयोग करने के लिए यह आवश्यक होता है कि प्राप्त डाटा को सॉफ्टवेयर की सहायता से तैयार किया जाता है ।

(iii).इसमें कर्मचारी सर्वे के दौरान कार्य अथवा डाटा की जांच नहीं कर सकते हैं

(iv). सर्वे के दौरान इस उपकरण को उठाकर ले जाना पड़ता है ।

E.D.M. :-ELECTRONIC DISTANCE MEASURING DEVICES.:- इसकी खोज 1950 में हुईं ।

इलैक्ट्रॉनिक डिस्टेंस मेजरिंग डिवाइस (Electronic Distance Measuring Devices):-यह डिवाइस समान्यत: सर्वे में दूरी मापने के लिए प्रयुक्त किया जाने वाला एक प्रमुख उपकरण है यह इलैक्ट्रो - मैग्नेटिक तरंग संचरित करके प्रचालित होता है ।

सिद्धान्त ( PRINCIPLE ) :- E. D. M. ( ई॰ डी॰ एम॰)मुख्य यूनिट से प्रसारित की जाने वाली इलैक्ट्रो - मैग्नेटिक तरंग की फेज शिफ्ट मे परिवर्तन के आधार पर कार्य करता है ।

टोटल स्टेशन सैटिंग (TOTAL STATION SETTING):-टोटल स्टेशन का उपयोग करने से पहले उसे सही तरीके से सेट किया जाता है इसके सेट करने के तरीके निम्न है -

1. CENTERING (सेंटरिंग ) :-यह टोटल स्टेशन को त्रिपाद पर सैट करने का तरीका है 

2. लेवलिंग ( LEVELLING ) :-इसमें सर्वप्रथम की त्रिपाद के लेवल सैट करके एक समान तल में कर लेते हैं । इसके बाद सर्वे बिंदु को रेटिकल के सेंटर पर सेट कर लेते हैं ।

3.स्क्रीन पर लेवलिंग ( LEVELLING ON THE SCREEN ) :-सर्वप्रथम सिस्टम को ऑन करते हैं ।इसके बाद डिस्प्ले पर प्रदर्शित MEAS मोड का चयन करते है ।इससे डिस्प्ले पर डॉट के समान बबल दिखाई देने लगेगा |

टोटल स्टेशन मापन ( TOTAL STATION MEASUREMENT ) :- टोटल स्टेशन द्वारा सामान्यता दूरी क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर कोण आदि मापे जाते हैं ।

1. दूरी मापन ( Distance Measurement) :-

(i).सर्वप्रथम डिस्टेंस मेजरमेंट मोड सैट करते हैं ।

(ii).अब टारगेट टाइप प्रिज्म एवं वातावरणीय गुणांक का मान सैट करते हैं ।

(iii) .इसके बाद डिस्प्ले पर मेष ( MEAS ) मोड सेलेक्ट करके दूरी मापने के लिए प्रयुक्त सॉफ्ट की ( Soft key ) दबाते हैं ।

2. कोण मापन ( Angle Measurement ) :-

(i). सर्वप्रथम उपकरण को एंगल मेजरमेंट मोड पर सेट कर लेते हैं ।

(ii).अब टारगेट टाइप , प्रिज्म एवं वातावरणीय गुणांक आदि का मान सैट कर लेते है ।

(iii) .इसके बाद इस प्ले और मेष मोड सेलेक्ट करके कोण  मपने के लिए प्रयुक्त सॉफ्ट की दबाते हैं ।



** इलैक्ट्रॉनिक डिस्प्ले ( ELECTRONIC DISPLAY ) :- टोटल स्टेशन के विभिन्न मानो  को दर्शाने के लिए इलैक्ट्रॉनिक डिस्प्ले  का उपयोग किया जाता है इसमे  डिजिटल डिस्प्ले - का उपयोग किया जाता है । टोटल स्टेशन में प्रयुक्त की जाने वाली इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले ( L . E .D . )  डिस्प्ले की विशिष्टताएं निम्न प्रकार हैं - 

(1). तरंगदैर्घ्य 850 mm , 

(2 ) . ड्राइव  विधि ( cw )

( 3 ) . आउटपुट पावर < 200 Hw

( 4 ). रिपिटिशन रेट 15 kHz

**डाटा रीडिंग ( Data Reading ) :- टोटल स्टेशन में डिस्प्ले पर प्राप्त डाटा का उपयोग करना ही  डाटा रीडिंग हैं इसके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित है -

 (i) .रिकॉर्ड देखना ( viewing Records )

(ii) .रिकॉर्ड डिलीट करना ( Deleting Records )
( iii). रिकॉर्ड एडिट करना ( Editing Records )

निर्देशांक प्रणाली ( Coordinate system):- किसी बिंदु को दर्शाने को ही निर्देशान प्रणाली कहते हैं |

हम लोग दो प्रकार के निर्देशन प्रणाली का उपयोग करते हैं ।
1. रेक्टेंगुलर निर्देशांक प्रणाली (Rectangular coordinate)
2. पोलर निर्देशांक प्रणाली(Polar Coordinate system)


सोमवार, 18 अप्रैल 2022

CURVES (वक्र ) के महत्वपूर्ण परिभाषा एवं उसके नोट जो अग्रामी परिक्षा में आने की संभावना है।

 

प्रिय पाठको हम आपके लिए सर्वेयर 2 year के Curve ( वक्र ) पाठ के महत्वपूर्ण नोट लाए है। जो आपके Exam के लिए महत्वपूर्ण है। कृपया आप लोग और नोट के लिए हमारे Blogg post को Follow कर लें । धन्यवाद | | चलिए पाठ शुरू करते है।

Note : यहां पर लाल रंग से लिखे गए बिंदु प्रश्न है |

CURVES ( वक्र) :- वक्र आमतौर पर संचार की रेखा में नियोजित होते हैं ताकि सीधि रेखा के चौराहे पर दिशा परिवर्तन क्रमिक हों।

  वक्र मुख्यतः तीन प्रकार के होते है।

1. वृत्ताकार वक्र(Circular Curve)
2. परवलयाकार वक्र(Parabolic Curve)
3. सर्पिलाकार वक्र(Spiral Curve)

1. वृताकार वक्र(Circular Curve) :- मुख्यत : तीन प्रकार के होते है ।

i. सरल वृत्ताकार वक्र (Simple Circular Curve)
ii. यौगिक वृत्ताकार व्रक (Compound Circular Curve)
iii. उत्क्रम वृत्ताकार वक्र(Reverse Circular Curve).

## सरल वक्र की परिभाषाएं एवं आधारभूत पद (DEFINITIONS AND BASIC TERMS FOR SIMPLE CURVE )##

1. पश्च स्पर्श रेखा (Back tangent ) :- सर्वेक्षण कार्य की प्रगति की दिशा में वक्र की प्रारम्भिक बिंदु ( Initial point) पर जो स्पर्श रेखा होती हैं । उसे पश्च या पिछली स्पर्श रेखा कहते है।

2. अग्र स्पर्श रेखा ( Forward tangent ) :- सर्वेक्षण कार्य की प्रगति की दिशा में वक्र के समापन बिंदु ( End point ) पर जो स्पर्श रेखा होती है उसे अग्र स्पर्श रेखा कहते है । 

3. प्रतिच्छेद बिंदु ( Point OF Intersection ) :- जब दोनो स्पर्श रेखा आगे बढाया जाए तो वे एक बिन्दु पर आपस में काटती है। यह बिंदु प्रतिच्छेद बिंदु कहलाता है। इसे संक्षेप में  P .I भी कहते है ।

4. वक्र बिंदु ( curve points) :- वक्र बिंदु वह बिंदु होता है जहां पश्च स्पर्श रेखा , वक्र से मिलती है । इसे संक्षेप में P.C ( Point of curve ) भी कहते है |

5. स्पर्श बिंदु ( Tangency point) :- इसे अग्र स्पर्श बिंदु भी कहा जाता है । यह वह बिपु होता है, जहां अग्र स्पर्श रेखा वक्र के साथ मिलती है। इसे P .T कहा जाता है ।

6. प्रतिच्छेद कोण ( Intersection angle ) :- दोनो स्पर्श रेखा के द्वारा किसी बिंदु पर बना कोण प्रतिच्छेद कोण कहलाता है । 

7. विक्षेप कोण ( Deflection angle ) :- किसी बिंदु का विक्षेप कोण वह कोण होता है जो पश्च स्पर्श बिंदु पर पश्च स्पर्श रेखा व उस बिंदु तथा पश्च स्पर्श बिंदु को मिलाने वाली जीवा ( chord) फे मध्य बनता है । इसे ∆ से दर्शाया जाता है ।

8. स्पर्श रेखा दूरी ( Tangent distance) :- यह वह दूरी होती है , जो स्पर्श बिंदु व प्रतिच्छेद बिन्दु के बीच होती है इसे T के द्वारा दर्शाया जाता है।

 T = Rtan∆ / 2


9. बाह्य दूरी ( External distance) :- वक्र के मध्य तथा प्रतिच्छेद बिंदु के बीच की दूरी को बाह्य दूरी कहते है। इसे E से दर्शाया जाता है ।

शीर्ष दूरी(Apex distance) E=Rtan∅/2
या,E = R( sec∆/2-1)

10. वक्र की लम्बाई ( Length of Curve ) :- पश्च स्पर्श बिन्दु तथा अग्र स्पर्श बिंदु के बीच वक्र की लम्बाई को वक्र लम्बाई कहा जाता है, इसे l के द्वारा दर्शाया जाता है ।

l=R.∆(∆ in radians)

l=R.∆π/180°(∆ in degree)

l=π∆R/180°

11. दीर्घ जीवा ( Long chord ) :- पर्श्च स्पर्श बिंदु व अग्र स्पर्श जिस रेखा द्वारा मिलते है , उसे दीर्घ जीवा कहते है । इसे ( L) के द्वारा दर्शाया जाता है। 

sin∆/2=L/2R

L=2Rsin∆/2

12. सामान्य जीवा ( Normal chord ) :- वक्र पर लगाए गए दो क्रमिक नियमित स्टेशन बिन्दुओं के मध्य की दूरी , सामान्य जीवा कहलाती है । इसे C से सूचित किया जाता . है।

13 . उप - जीवा ( Sub - chord) :- सामान्य जीवा से छोटी लम्बाई की जीवाओं को उप - जीवा कहते हैं ।

14 . मध्य कोट्यांक ( mid ordinate ) : - दीर्घ जीवा के मध्य बिंदु तथा वक्र के मध्य बिंदु को मिलाने वाली रेखा को . मध्य कोट्यांक कहा जाता है । M से दर्शाया जाता है ।

 M = R - cos∆/2

या R ( 1 - cos∆/2)

15. दायां हाथ वक्र ( Right hand Curve ) :- इसे दक्षिणवती वक्र ( clockwise curve ) भी कहा जाता है । यह वक्र सर्वेक्षण की दिशा के सन्दर्भ मे बाएं हाथ की दिशा की तरफ मुड़ जाता है।

16. बायां हाथ वक्र ( Left hand curve ) :- इसे वामावर्ती ( Anti clockwise Curve ) कहा जाता है। यह दक्र सर्वेक्षण की दिशा के संदर्भ मे बाएं हाथ की दिशा की तरफ मुड़ जाता है।

17. केन्दीय कोण ( central anglel ) :- वक्र के चाप द्वारा केन्द्र पर बना कोण केन्द्रीय कोण कहा जाता है। इसका मान विक्षेप कोण (∆) के बराबर होता है।

*** किसी वक्र को बनाने के लिए निम्नलिखित अवयवो का ज्ञान होना आवश्यक है ।***

1. वक्र की लम्बाई ( Length of curve )
2. स्पर्श रेखा की लम्बाई ( Length of tangent )
3. दीर्घ जीवा की लम्बाई ( Length of long chord )
4. बाह्य दूरी अथवा शीर्ष बिंदु दूरी ( Apex or Enternal distance )
5. मध्य कोट्याक (Mid - ordinate )

**वक्र के पदनामों ( DESIGNATIONS) को दो प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है।**

1. वक्र की  त्रिज्या ( Radius of Curvature )
2. वक्रांश ( Degree of Curvature )

1. वक्र की त्रिज्या ( Radius of Curvature ): - पहली विधि मुख्यत: ब्रिटिश में अधिक प्रचलित है , जबकी दूसरी विधि भारत , अमेरिका , कनाडा तथा कई दूसरे देशों में प्रचलित है। पहली विधि को 40 मीटर वक्र या 70 मीटर वक्र द्वारा प्रदर्शित करते हैं , जो यह बताता है की  त्रिज्या 40 मीटर या 70 मीटर है। दूसरी विधि में वक्र को 8° वक्र द्वारा प्रदर्शित करते है। यह विधि भारत में सबसे ज्यादा प्रयोग की जाती है।

2 . वक्रांश ( Degree of Curvature ) :- निश्चित लम्बाई की जीवा द्वारा या चाप द्वारा वक्र के केन्द्र बिंदु पर बना कोण वक्रांश कहलाता है। इस विधि के अनुसार वक्र को 1°,2°,3° आदि से अंकित किया जाता है। FPS प्रणाली में 100 फीट लम्बे चाप या जीवा द्वारा वक्र के केन्द्र पर बना कोण वक्रांश कहलाता है। जबकी MKS प्रणाली में 20 मीटर की चेन को मानक चेन मानकर 20 मीटर के चाप द्वारा वक्र के केन्द्र पर बना कोण वक्रांश कहलाता है। इसे ' D ' द्वारा दर्शाया जाता है।

6.सरल वक्र खीचनें या निशानबंदी की विधियां

= किसी क्षेत्र में सरल वक्र खीचने के लिए कई बिंद बनाएं . जाते है। इन बिंदुओं के मिलाने से वांछित वक्र प्राप्त होता है। इन बिंदुओं का स्थापन ही वक्र की निशान बन्दी कहलाती है। 
                   सरल वक्र की निशानबंदी की विधियों की उपयोग में लाए जाने वाले उपकरणों के आधार पर दो भागो में विभाजित किया जा सकता है - 

1 . रैखिक विधियां ( LINEAR METHODS )
2. कोणीय विधियां ( ANGULAR METHODS )

1. रैखिक विधियां ( Linear Methods ):- रैखिक विधि में जरीब या फीते का ही प्रयोग किया जाता है , अन्य किसी कोणमापी यंत्र को काम मे नही लिया जाता है। ये विधियां छोटी लम्बाई एवं कम परिशुद्धता वाले वक्रो की निशानबंदी हेतु प्रयोग की जाती है।

      सरल वक्र की निशानबंदी के लिए निम्नलिखित रैखिक विधियां प्रयोग की जाती हैं।

(i ) दीर्घ जीवा से कोटियां या खसके नाप कर

( ii ) वक्र के चापों के क्रमिक समद्धिभाजन द्वारा

(iii ) स्पर्श रेखा द्वारा खसके नाप कर

( iv ) बढ़ाई गई जीवाओं से खसके या विक्षेप दूरियां नाप कर |

(2) . कोणीय विधियां ( Angalar Methods ) :- निशानबंदी की इस विधि में केवल नापी यंत्र जैसे थियोडोलाइट का उपयोग किया जाता है ।

        सरल वक्र को थियोडोलाइट की सहायता से बनाने की विभिन्न विधियां इस प्रकार है।

(i) . रैंकिग की विक्षेप कोण विधि ( Rankine 's methods of deflection )

( ii) . दो थियोडोलाइट विधि ( Two theodolite Methods ) 

(iii) . टैक्योमीट्रिक विधि ( Tacheometric Methods )


*यौगिक वक्र ( COMPOUND CURVE) :- दो या दो से अधिक वृत्तो के चापों से बना वक्र यौगिक वक्र कहलाता है।

अर्थात् यह एक ही दिशा में घूमते हुए एक से अधिक त्रिज्याओं का एक सतत वक्र होता है।

**उत्क्रम वक्र ( REVERSE CURVE):- उत्क्रम वक्र दो वृत्तो के चापों से बनता है जिनके केन्द्र उभयनिष्ठ रेखा के दोनो तरफ होते है। इन दोनो वृत्तो के चाप एक ही त्रिज्या के या अलग -अलग त्रिज्या के होते है। ये वक्र उन परिस्थितियों मे उपयोग में लाए जाते है, जब दो सीधी रेखाएं जिन्हे वक्र में जोड़ना है, या तो एक दूसरे के समानान्तर हो या इनमें कोण बहुत छोटा हो। ऐसी परिस्थिति में जहां सड़को अथवा रेलों पर गति बहुत तेज होती है , वहां इस वक्र का प्रयोग नही करना चाहिए ।

           उत्क्रम वक्र के दोनो वक्र दो भिन्न दिशाओं की ओर मुड़ते है तथा उनके मिलन बिंदु पर एक उभयनिष्ठ रेखा होती है। दो वक्रो का यह मिलन बिंदु , उत्क्रम वक्र बिंदु (Point of reverse curvature) कहते है । इस P.R.C. में त्यक्त करते है।

    उत्क्रम वक्र निम्नलिखत कारणों से नही लगाना चाहिए ।

(1) .वक्र के उत्क्रम बिन्दु पर एकदम से वक्र में बाहरी उठान ( super elevation ) उल्टी दिशा में नही दिया जा सकता है।

( 2) . उत्क्रम वक्रता बिंदु पर एक तरफ से दूसरी तरफ , पथ के झुकाव ( cant ) को आकस्मिकता से बदलना आवश्यक हो जाता हैं।

( 3 ) दिशा में आकस्मिक परिवर्तन होने के कारण यात्रियों को बहुत असुविधा होती हैं।

(4). वक्र के उत्क्रम बिंदु पर सड़क या रेल किनारे को ऊंचा करने की सुविधा नही रहती है।

(5). उत्क्रम वक्रता बिंदु पर ड्राइवर के लिए स्टियरिंग संभालना बहुत कठिन होता है। ड्राइवर को सावधान रहना पड़ता है। अन्यथा दुर्घटना की संभावना रहती हैं।


***संक्रमण वक्र ( TRANSITION CURVE) :- ऐसा वक्र जिसकी वक्रता त्रिज्या, वक्र के प्रत्येक बिंदु पर बदलती रहती है, संक्रमण पक्र कहलाता है।

           इसे मुख्यत : सीधी रेखा को एक साधारण वक्र या एक यौगिक वक्र के दोनो चापों को जोड़ने के लिए लगाया जाता है ।

जैसेः- सड़क पर वाहन के मुड़ते समय ऐसा अनुभव होता है कि गाड़ी सड़क से बाहर फैंका जा रहा है ( अपकेन्द्रिय बल के कारण) । इसलिए सीधी सड़क व वृत्ताकार वक्र के मध्य संक्रमण वक्र लगा दिए जाते है ' तो वाहन के मुड़ने पर कोई झटका महसूस न हो।

** संक्रमण वक्र के उद्देश्य (Purpose of Transition Curve) :- 

( 1) .सीधी रेखा को साधारण वक्र से जोड़ने के लिए यह वक्र अनन्त त्रिज्या से साधारण वक्र की त्रिज्या तक होता है। इससे वाहन को सीधी सड़क से वक्र पर जाने में झटका महसूस नहीं होता है।

( 2 ) . सीधी सड़क पर शुन्य बाह्य उठान होने से साधारण वक्र पर एक निश्चित बाहरी उठान लगाने में मदद मिलती है ।

संक्रमण वक्र के प्रकार (Types of transition) : - संक्रमण वक्र मुख्यत: तीन प्रकार के होते है।
( i ) . लेमिनस्केल ( Leminscale )
( ii ) . क्लोथोइड ( clothoid )
(iii ) . क्यूबिक परवलय ( Cubic Parabola )

**संक्रमण वक्रो की स्थापन (SETTING OUT OF TRANSITION CURVE ) :- एक संक्रमण वक्र को निम्नलिखित विधियां से स्थापित किया जाता है :-

1. खसका विधि (OFFSET METHODS)

2. विक्षेप कोण की विधियां (METHODS OF DEFLECTION ANGLES)


ऊर्ध्वाधर वक्र (VERTICAL CURVE) :- ऊर्ध्वाधर वक्र का उपयोग रेल - रोड हाइवे या अन्य रास्तों की दो प्रतिच्छेदी ग्रेड रेखाओं को जोड़ने मे आता है । इनकी सहायता से ऊर्ध्वाधर गति फी समतलता ( smoothnes ) प्रदान कर सकते है ।

हाइवे या रेल - रोड के लिए ग्रेड को दो प्रकार से व्यक्त किया जा सकता है।

(i ) . प्रतिशत के रूप में, Eg :- 2% , 3% , आदि ।

(ii ) 1 में n ढाल : eg : 1 में 100 , 1 मे 400 आदि ।

ऊर्ध्वाधर वक्र के प्रकार (TYPES OF VERTICAL CURVE)

:- यह मुख्यत : दो प्रकार के होते है -

1 . शीर्ष या उत्तल वक्र ( summit Curves ) :- जब कोई रेलवे लाइन या सडक , किसी पहाड़ी से या ऊपड़ उठे हुए धरातल से गुजरती है तो उभरे हुए  धरातल पर बना वक्र उत्तल वक्र कहलाता है , अथवा  ऊर्ध्वाधर समतल में वक्र की उत्तलता जब ऊपर की ओर होती है तो उसे उत्तल वक्र कहते ह ।
2. अवतल वक्र ( Valley Curve ) :- जब कोई सड़क या रेलवे लाइन एक अवनमित धरातल पर से गुजरती है तो इस जगह ऊर्ध्वाधर समतल में बना वक्र अवतल वक्र कहलाता है इसें घाटी वक्र भी कहते है

Total station objective 2023question

 1. टोटल स्टेशन द्वारा किस घटक का मापन किया जाता है ? (a) दूरी                      ( b ) कोण ( c ) क्षेत्रफल              (d) उपरोक्त सभी 2...