सड़क इंजीनियरिंग सड़क अभियांत्रिकी ,अभियांत्रिकी की एक महत्वपूर्ण शाखा है । सड़क अभियांत्रिकी की का संबंध सड़कों को बनाना डिजाइन करना तथा उनका अनुरक्षण करने से होता है
सड़कों की तुलना मानव शरीर की खून की नसों से की जा सकती है ।
सड़क यातायात , यातायात के सभी माध्यमों में लोगों के सबसे अधिक नजदीक है । केवल सड़क मार्ग ऐसा नेटवर्क जो देश के दूरस्थ स्थानों तक पहुंचता है ।
सड़क अभियांत्रिकी में काम आने वाले महत्वपूर्ण शब्दावली (IMPORTANT TERMS USED IN ROAD ENGINEERING)
1. सड़क (ROAD ) : -वह निर्माण यो यातायात के आवागमन (Transportation ) को सुरक्षित एवं आसान बनाता हैं |
2 सड़क अभियांत्रिकी ( Road Engineering ) :- सड़क बनाने,डिजाइन व अनुरक्षण कला को सड़क अभियांत्रिकी की कहते है।
3.महामार्ग ( Highway) :- देश की महत्वपूर्ण सड़के महामार्ग की श्रेणी में आती है ।
4.कैरिज वे (carriage way ) :-सड़क का पक्का भाग , जिस पर मोटर ट्रैफिक चलता है कैरिज - वे कहलाता है । एकल लेन के लिए कैरिज - वे की चौड़ाई 3. 80 मीटर तथा दो लेन के लिए यह चौड़ाई 7.0 मीटर होती है ।
5.फुटपाथ ( Footpath ) :- फुटपाथ समानता शहरी सड़कों में बनाए जाते हैं । सड़क के कैरिज - वे के दोनों तरफ पैदल चलने वालो के लिए फुटपाथ बनाया जाता है । इसकी चौड़ाई 1.25 मीटर से 2 मीटर तक होती है तथा यह सड़क की कैरिज - वे की सतह से 15 सेमी (cm) से 20 सेमी (Cm) ऊंचा होता है । इसका मुख्य कार्य पैदल चलने वाले लोगों के लिए सड़क के साथ-साथ सुरक्षित जगह प्रदान करना होता है । इसके निर्माण के लिए ईट व सीमेन्ट कंक्रीट प्रयोग किया जाता है ।
6.स्कन्ध ( shoulders ) :- स्कन्ध देहाती सड़क के किनारों के अनुदिश दिए जाते हैं तथा देहाती सड़कों के कैरिज - वे के पार्श्व ( side ) दोनों तरफ स्कन्ध की चौड़ाई 1. 25 मीटर से 2 मीटर तक होती है । स्कन्ध का तल एवं सड़क का तल एक ही होता है।
फुटपाथ एवं स्कन्ध दोनों ही सड़क के कैरिज वे को साइड से सहारा देते है तथा भार के कारण सडक को बाहर की तरफ फैलने से रोकते है।
स्कंन्ध में बाहर की तरफ ढाल की जाती है जिससे बारिश का पानी सड़क तथा स्कन्ध से साइड में बनी नालियों में बह जाता है ।
7. संरेखण ( Alignment ) :-भूमि पर सड़क की मध्य रेखा ( center line )की स्थिति को संरेखण कहते हैं ।
8. पार्श्व ढाल या कैम्बज ( Close Slope Or chamber ) :-सड़क की ऊपरी सतह उत्तर ( convex )होती है अर्थात मध्य भाग सड़क के किनारों से ऊंचा होता है ।सड़क की सतह दोनों किनारों की ओर पार्श्व दिशा में ढालू होती है सड़क की इसी पार्श्व ढाल को कैम्बर कहते हैं । कैम्बर का मुख्य कार्य , सड़क की सतह से सुव्यवस्थित ढंग से बारिश के पानी की निकासी करना होता है। यह सड़क की सतह , वर्षां आपुष्ठन पदार्थ की पारगम्यता तथा सड़क के स्कन्ध पर निर्भर करता है।
9. बाहरी उठान (super Elevation ) :- क्षैतिज वक्र पर सड़क के बाहरी किनारे का अन्दर वाले किनारे से ऊपर उठाना ही , बाहरी उठान कहलाता है। इसे कई बार कैंट या बैंकिग ( Banking ) भी कहा जाता है।
10. दृष्टि दूरी ( sight Distance ) :- किसी चालक द्वारा अधिकतम दूरी तक आगे देखने की क्षमता दृष्टि दूरी कहलाती है।
11. मार्गाधिकार ( Right of way) :- सडक के लिए भूमि का वह भाग , जो सड़क बनाने हेतु काम में लिया जाता है , मार्गाधिकार कहलाता है। इसका उपयोग भविष्य में सड़क का आवश्यकतानुसार विस्तार करने एवं इसके मध्य आने वाली संरचनाओ जैसें - पुल , सुरंग आदि के लिए किया जाता है।
12 कर्ब ( kerbs ) :- सड़क का वह भाग , जो पेवमेन्ट एवं स्कन्ध के मध्य सीमा को दर्शाता है। कर्ब कहलाता है कभी - कभी द्वीपो , फुटपाथ या कर्ब पार्किंग जगह भी इसी श्रेणी में आती है।
13. यातायात विभाजक ( Traffic separator ) :- विरुद्ध दिशाओं से आने वाले यातायात को अलग अलग करने के लिए यातायात विभाजन लगायें जाते हैं, जिन्हे आम भाषा मे डिवाइडर कहा जाता है।
*** सड़को का वर्गीकरण ( CLASSIFICATION OF ROADS) :- भारतीय सड़क कांग्रेस (Indian Road Congress) की नागपुर योजना के अन्तर्गत निम्न भाग हैं -
1. राष्ट्रीय महामार्ग ( National Highways )
2. राज्य महामार्ग ( state Highways )
3. जिला सड़के ( District Roads) :- ( i ) . मुख्य जिला सड़कें ( MaJor District Roads ) ( ii ). अन्य जिला सड़के ( Other District Roads)
1. राष्ट्रीय महामार्ग ( National Highways) :- ये सड़के देश के महत्वपूर्ण सड़के होती हैं। ये देश के हवाई - अड्डे , बंदरगाहो , प्रांतो की राजधानियों एवं मुख्य औद्योगिक शहरों को मिलाती है पड़ोसी देशों को मिलाने वाली सड़के भी राष्ट्रीय महामार्ग कहलाती है।
इन सड़को के निर्माण एवं अनुरक्षण का जिम्मा केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित केन्द्रिय सार्वजनिक निर्माण विभाग (CPWD) या मिलिट्री इंजीनियरिंग सर्विस (MEF ) का होता है।
ये सड़क कम से कम दो लेन वाली अर्थात् 7 मीटर चौड़ी होनी चाहिए तथा सड़क के दोनो ओर कम से कम 2 मीटर चौड़े स्कन्ध होने चाहिए । यदि यातायात कम हो तो ये सड़क एकल लेन में भी बनाई जा सकती है।
राज्य महामार्ग ( State Highways :-प्रांत के मुख्य शहरों को मिलाने वाली सड़क राज्य महामार्ग कहलाती है । ये सड़क प्रांत के शहरों को राष्ट्रीय महामार्ग से भी मिलाती है ।
राज्य महामार्ग 2 ( दो) लेन वाला अर्थात 7 मीटर चौड़ी हो तो बहुत अच्छा रहता है साथ ही इसके दोनों तरफ 2 मीटर चौड़े स्कंध होने चाहिए ।
इस प्रकार की सड़के के निर्माण के लिए केंद्रीय सरकार राज्य सरकारों को अनुदान देती है तथा सड़कों को बनाने एवं अनुरक्षक की जिम्मेदारी राज्य सरकार द्वारा गठित सार्वजनिक निर्माण विभाग पीडब्ल्यूडी ( PWD )की होती है
जिला सड़के ( DISTRICT ROAD ) :-यह सड़के जिले की सीमा के अंदर ही होती है इसका मुख्य कारण उत्पादन केंद्रों को मंडियों , राज्य महामार्ग या राष्ट्रीय महामारर्गो से जोड़ते हैं ।
ये सड़के दो प्रकार की होती है -
(i) मुख्य जिला सर के अन्य जीरा सर के























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